यह किताब एक पत्रकार के नोट्स से बनी है. जिसमें बहुत सारे किस्से हैं. और कहीं ना कहीं यह पता चल जाता है कि लेखक को अपने कॉलेजों में से एक जेएनयू से कितना प्यार है. और होना भी चाहिए. लेखक जहां जहां गया वहां वहां उसने कुछ लिखा है.
आपको भी यह किताब नॉस्टैलजिया से भर देगी. और मंद मुस्कान आपको ज्यादातर किस्सों में देगी, बाकी में आपको सोचने को मजबूर कर देगी.
व्यक्तिगत तौर पर कहूँ, मतलब मेरी राय तो है भाई जल्दी पढ़ो. बहुत मजा आ रहा है. छोटी छोटी चीज है जो हम और किताबों में शायद मिस करते हैं, यहां मिल रही है. दुकानों के किस्से हैं. मूवीज के किस्से हैं. और हां, सबसे जरूरी बीच बीच में कविताएँ. (साभार इंस्टाग्राम)


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